सूरज से गुफ्तगू #40

Moushmi Radhanpara's avatarMoushmi Radhanpara

तुजसे बार बार मोहब्बत हो रही है
कभी तेरी गुस्ताखियों से
तो कभी तू मुझे जैसे देखे, उस नज़र से
कभी तेरी मुस्कराहट से
तो कभी तू जैसे मेरे करीब आये, उन बाहो से
कभी तेरी अनकही बातो से
तो कभी तू रूठ जाये, उस अंदाज़ से
बस तुजसे बार बार मोहब्बत हो रही है
कभी तेरी हरकतों से, तो कभी, बेवजह सही पर तुजसे.

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