
जीवन की जरूरतों को पूरा करने के लिए रोजमर्रा की चीजों को खरीदते हैं , खरीदते ही नहीं बेंचते भी हैं। बेंचते क्या है। वह जो बिक जाए , हां जो बिक जाय। मतलब आप भी अगर बिक जाए तो आप भी बिकाऊ माल हैं। भले आपका कीमत बहुत ज्यादा हो एक आम आदमी से। लेकिन आप भी बिकाउं हैं। लेकिन आप मानते नहीं है। आप जितना ऊंचे उहदे पर होते हैं, उतना ज्यादा कीमत आपकी लगती है। आज हर कोई जनधन खाता से जुड़ना चाहता , क्यों ? क्योंकि इसमें जनता का माल ज्यादा है । आप आसानी से चपट कर सकते हैं । सबको मालूम है आप ऐसे लिंक से जुड़ गए हैं। जिसमे हर रोज जेब गर्म हो रही है। और उस गर्मी से आपको चिकुनगुनिया भी नहीं होती। मजे की बात है किसी को पता भी नहीं चलता । आप हर रोज बिकते हैं । खरीदने …
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