फ्रांसिस ज़ेवियर का जन्म 7 अप्रैल 1506 को नवारे देश में हुआ। उनके बचपन में चारों तरफ़ युध्दों का माहौल था। जब युद्ध बंद हो गया तो उन्हें पेरिस विश्वविद्यालय में अध्ययन के लिए भेजा गया। वे अपने दोस्त पीटर फेवर के साथ कमरे में रहते थे। यह जोड़ी लोयोला के इग्नाटियस से बहुत प्रभावित हुई, जिसने फ्रांसिस को एक पुरोहित बनने के लिए प्रोत्साहित किया। 1530 में, फ्रांसिस ज़ेवियर ने अपनी मास्टर डिग्री हासिल की, और वे पेरिस विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र पढ़ाने लगे।

24 जून, 1537 को उनका पुरोहिताभिषेक हुआ। पोप पॉल III ने 1540 में येसु समाज धर्मसंघ की स्थापना के लिए मंजूरी दी। फ्रांसिस ज़ेवियर अपने पैंतीसवें जन्मदिन पर 1541 में भारत के लिए रवाना हुए। वे 6 मई, 1542 को गोवा पहुंचे। उन्होंने वहाँ सुसमाचार का प्रचार किया, गरीबों तथा जरूरतमंदों की सेवा की। वहाँ से वे जापान और चीन की भी यात्रा की।

3 दिसंबर 1552 को फ़्रांसिस ज़ेवियर की मृत्यु हुयी। 25 अक्टूबर, 1619 को संत पापा पौलुस तृतीय ने उन्हें धन्य घोषित किया। संत पापा ग्रेगोरी पन्द्रहवें ने द्वारा 12 मार्च, 1622 को लोयोला के इग्नाटियस के साथ फ्रांसिस ज़ेवियर को भी संत घोषित किया। वे काथलिक मिशनों के संरक्षक हैं और उनका पर्व 3 दिसंबर को है।

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