नवंबर 03 | संत मार्टिन डि पौरेस

संत मार्टिन डि पौरेस का जन्म पेरू के लीमा शहर में 9 दिंसबर 1579 में हुआ। इनकी माता अफ्रीकन या मूल अमेरिकन वासियों के वंश से थी तथा पिता स्पेन के थे। इनके पिता ने परिवार को त्याग दिया जिसके कारण मार्टिन की परवरिश घोर गरीबी में हुयी । मार्टिन को अपने जीवन में मिश्रित जाति का होने के कारण भेदभाव एवं अपमान सहना पडा।

युवा मार्टिन कई घण्टे प्रार्थना में बिताते थे तथा यूखारिस्तीय मिस्सा बलिदान में उनकी विशेष भक्ति एवं आस्था थी। वे अपना जीवन येसु की भक्ति तथा लोगों की सेवा करते हुये बिताना चाहते थे। इस भावना को लेकर मार्टिन डोमिनिकन धर्मसंघ में ब्रदर बने। धर्मसंघी के अपने जीवन में सुसमाचार की आज्ञाओं को अपने जीवन में लागू किया। उनके दिल में लोगों विशेषकर बीमार और गरीब लोगों के प्रति असीम प्रेम था। उन्होंने हर परिरिस्थति में लोगों की सेवा की। वे प्रार्थना तथा घोर तपस्या का जीवन बिताते थे। ईश्वर ने उन्हें अनेक आध्यात्मिक वरदानों से भर दिया। उन्होंने अनेक चमत्कारों द्वारा लोगों की मदद की तथा ख्राीस्त में उनके विश्वास को दृढ किया। 3 नवम्बर, सन 1639 को उनकी मृत्यु हुई।

संत का जीवन हमें सिखाता है कि हम ईश्वर को हर परिस्थिति में प्यार कर सकते हैं। वे स्वयं गरीबी, तिरस्कार, अपमान तथा भेदभाव के शिकार थे किन्तु उन्होंने कभी इसकी शिकायत नहीं की बल्कि सभी को प्रेम तथा उनकी सेवा करने का प्रयत्न किया। येसु की आज्ञा, ’’तुम में ऐसी बात नहीं होगी। जो तुम लोगों में बडा होना चाहता है, वह तुम्हारा सेवक बने और जो तुम में प्रधान होना चाहता है, वह तुम्हारा दास बने।’’ (मत्ती 20:26-27) मार्टिन के जीवन में साक्षात रूप से दिखती है।

वे मिश्रित जाति, नौकरों, नाईयों, सार्वजनिक स्वास्थ्य कर्मियों आदि के संरक्षक संत है। संत पापा योहन तेईसवें ने 6 मई 1962 को इन्हें संत घोषित किया।

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